मोदी सरकार के 12 साल:
सफलता, विवाद और जनता के सवाल
कौन सी योजना काम आई, कहाँ हुआ घोटाला, और आगे क्या? तथ्यों के आधार पर एक ईमानदार समीक्षा।
26 मई 2026 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे हो गए। यह दौर भारत के लिए परिवर्तनकारी भी रहा और विवादास्पद भी। डिजिटल क्रांति हुई, लेकिन बेरोज़गारी बनी रही। मंदिर बना, लेकिन पेपर लीक भी हुए। Electoral Bond घोटाला सामने आया, लेकिन आयुष्मान योजना से करोड़ों को इलाज मिला।
KHOLA ने trusted sources — World Bank, Supreme Court judgements, Mint, Bloomberg, Al Jazeera — के आधार पर यह analysis तैयार की है।
12 साल में देश बदला — आंकड़ों में
कौन सी योजनाएं सफल रहीं?
हर योजना का असल असर देखते हैं — सरकारी प्रचार नहीं, ज़मीनी हकीकत:
UPI — डिजिटल भुगतान क्रांति
2014 में डिजिटल पेमेंट लगभग शून्य था। आज UPI की share डिजिटल transactions में 83% है। जनवरी 2025 में रिकॉर्ड 16.99 अरब transactions हुए।
आयुष्मान भारत (PM-JAY)
2018 में शुरू इस योजना ने गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज दिया। The Lancet की रिपोर्ट के अनुसार cancer की जल्दी पहचान में 36% सुधार हुआ।
PM Jan Dhan Yojana
52 करोड़ से ज़्यादा zero-balance accounts खुले, खासकर ग्रामीण भारत में। DBT (Direct Benefit Transfer) से सब्सिडी सीधे खाते में जाने लगी।
उज्ज्वला योजना
BPL परिवारों की महिलाओं को 9.6 करोड़ LPG connections दिए गए। चूल्हे के धुएं से होने वाली बीमारियों में कमी आई।
PM Awas Yojana (PMAY)
PMAY-Rural ने 88% target पूरा किया। Urban component में 1.2 करोड़ घर sanctioned हुए पर केवल 80 लाख बने। कई घर incomplete या quality issues के साथ।
Highway & Infrastructure
National Highways 91,287 km (2014) से बढ़कर 1,46,204 km (2024) हो गए। 99% rural areas को road connectivity मिली। Metro का विस्तार 20+ शहरों में हुआ।
KHOLA का फैसला — Infrastructure और Digital India
इन दोनों क्षेत्रों में मोदी सरकार की उपलब्धियां वास्तविक और मापने योग्य हैं। UPI आज वैश्विक benchmark बन चुका है। Road और metro expansion के आंकड़े सरकारी और गैर-सरकारी दोनों sources confirm करते हैं।
कहाँ हुई सबसे बड़ी विफलताएं?
📝 NEET Paper Leak — 6 करोड़ युवाओं की उम्मीदें धूल में
NEET 2024 और NEET 2026 — दोनों में paper leak के गंभीर आरोप लगे। विपक्ष का दावा है कि NTA गठन (2018) के बाद से अब तक 93 बार exam papers leak हो चुके हैं। 2.4 करोड़ से ज़्यादा students हर साल NEET देते हैं। 2026 में exam cancel करनी पड़ी — लेकिन Education Minister ने इस्तीफा नहीं दिया।
📌 स्रोत: The Statesman, National Herald India, Careers360 (मई 2026)
बेरोज़गारी — सबसे बड़ी नाकामी
World Bank के अनुसार 2025 में India का Youth Unemployment Rate 16% है। 2017-18 में यह 45 साल के highest 6.1% पर था। Make in India योजना के बावजूद Manufacturing की GDP में हिस्सेदारी 16.7% (2014) से घटकर 13.9% (2025) हो गई। PLI Scheme के तहत ₹1.9 लाख करोड़ के वादे में से केवल ₹14,000 करोड़ ही disbursed हो पाए — महज 8%।
💸 नोटबंदी (2016) — विवाद अभी भी जारी
सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद किए — black money और fake currency रोकने के नाम पर। RBI की रिपोर्ट में सामने आया कि 99% से ज़्यादा नोट वापस आ गए। छोटे व्यापारी, किसान और daily wage workers सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। आलोचकों ने कहा — काला धन तो नहीं निकला, लेकिन अर्थव्यवस्था हिल गई।
📌 स्रोत: RBI Annual Report, Bloomberg
बढ़ता कर्ज़ — आम आदमी पर बोझ
Business Standard के अनुसार हर व्यक्ति का per capita debt 2023 में ₹3.9 लाख था जो 2025 में ₹4.8 लाख हो गया — यानी दो साल में ₹90,000 की बढ़ोतरी। आम आदमी की कमाई का 25.7% हिस्सा EMI चुकाने में जा रहा है।
बड़े घोटाले और विवाद — Supreme Court तक पहुंचे
इन मामलों में कोर्ट के आदेश या जांच हो चुकी है — ये महज विपक्ष के आरोप नहीं:
🏦 Electoral Bond घोटाला — आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा चुनावी भ्रष्टाचार?
15 फरवरी 2024 को Supreme Court ने 5-judge Bench द्वारा Electoral Bond Scheme को सर्वसम्मति से असंवैधानिक घोषित किया। Data सामने आया तो पता चला कि BJP को ₹8,000 करोड़ से ज़्यादा bonds मिले — Congress को ₹1,950 करोड़। कई कंपनियों ने ED/CBI जांच के दौरान BJP को donation दी — जांच के बाद उन पर कार्रवाई रुक गई।
📌 स्रोत: Supreme Court of India (Feb 2024), Al Jazeera Investigative Report, FATF
"Electoral Bond Scheme ने corruption को legal जामा पहनाया। इसने corporate donors को unlimited और anonymous donation की छूट दी।" — Supreme Court of India, Constitutional Bench, February 2024
🏗️ Make in India — वादा बड़ा, हकीकत छोटी
Manufacturing का GDP में हिस्सा घटा। PLI Scheme में 92% funds disbursed ही नहीं हुए। Private sector investment FY24 में 11 साल के lowest पर आ गई — 32.4%। India को China छोड़ने वाली कंपनियों का "factory" बनना था, लेकिन वो जगह Bangladesh और Vietnam ने ली।
📌 स्रोत: Indian National Congress Economic Analysis, Reserve Bank of India data
दोनों पक्ष — KHOLA की निष्पक्ष नज़र
🟢 समर्थकों की बात
- ✓UPI से India digital payment leader बना
- ✓Highways और Airports का तेज़ निर्माण
- ✓आयुष्मान से 11.7 करोड़ इलाज मुफ्त
- ✓G20 Presidency में India की वैश्विक छवि
- ✓Jan Dhan से बैंकिंग का लोकतंत्रीकरण
- ✓Operation Sindoor में सेना की ताकत
- ✓Startup India — 1 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप
🔴 आलोचकों की बात
- ✗Youth Unemployment 16% — 12 सालों में हल नहीं
- ✗Electoral Bond — SC ने असंवैधानिक माना
- ✗NEET Paper Leak — 6 करोड़ युवाओं का नुकसान
- ✗PLI Scheme — केवल 8% funds ही खर्च हुए
- ✗Press Freedom में India की रैंकिंग गिरी
- ✗विपक्षी नेताओं पर ED/CBI का इस्तेमाल
- ✗Personal debt बढ़ा, real wages नहीं
लोकतंत्र पर सवाल — और 2024 चुनाव का संदेश
2024 Lok Sabha elections में BJP अकेले majority नहीं ला पाई — पहली बार coalition government बनानी पड़ी। यह जनता का एक स्पष्ट संदेश था।
जनता ने क्या कहा?
International Crisis Group के विश्लेषण के अनुसार 2024 elections ने India को coalition politics के दौर में वापस ला दिया। Modi खुद Varanasi में narrow margin से जीते। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई, बेरोज़गारी और NEET जैसे issues ने BJP की हार में भूमिका निभाई।
KHOLA का निष्कर्ष
12 साल की मोदी सरकार को किसी एक रंग में नहीं देखा जा सकता। UPI और Infrastructure — निश्चित रूप से ऐतिहासिक उपलब्धि। आयुष्मान और Jan Dhan — करोड़ों गरीबों के लिए वरदान।
लेकिन Electoral Bond का Supreme Court द्वारा असंवैधानिक घोषित होना, NEET Paper Leak का बार-बार होना, बेरोज़गारी का हल न निकलना — ये महज विपक्ष के आरोप नहीं, बल्कि तथ्य हैं।
एक जागरूक नागरिक का काम है — दोनों पक्षों को देखना, सवाल पूछना, और वोट करते वक्त फैसला खुद लेना। यही KHOLA का मकसद है।